Practical Manual on Mulberry Leaf Production Technology
Practical Manual on Mulberry Leaf Production Technology

Practical Manual on Mulberry Leaf Production Technology

by डा. द्वारका (Dr. Dwarka), डा. एस. जी. घुगल (Dr. S.G. Ghugal), डा. मनोज कुमार अहिरवार (Dr. Manoj Kumar Ahirvar) and श्रीमति निशा चढ़ार (Mrs. Nisha Chadar)

Format:

Paperback and E-book

Pages:

179

ISBN:

978-93-48188-06-9

280.00

यह प्रायोगिक पुस्तिका "शहतूत पत्तों के उत्पादन हेतु प्रौद्योगिकी" पर एक विस्तृत और उपयोगी संसाधन है, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और किसानों के लिए समान रूप से लाभकारी होगी

Free Shipping Book

For all orders

Returns

No returns are allowed (please refer to Return Policy)

Order Cancellation

Order can be cancelled upto 24hrs of placing the order

Order Payment

Prepaid orders only

About This Book

About the Authors

कीटशास्त्र विभाग कृषि का एक प्रमुख घटक है और कृषि विज्ञान स्नातकों, मास्टर्स और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के लिए एक लोकप्रिय विषय है। रेशमकीट पालन कीटविज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण शाखा है। विषय विविधता के कारण कीटशास्त्र विभाग के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कई प्रकाशन लिखे गए हैं। इस प्रायोगिक पुस्तिका में "शहतूत पत्तों के उत्पादन हेतु प्रौद्योगिकी" से संबंधित सामग्री को संक्षिप्त व आसानी से समझ आने वाली शैली में प्रस्तुत किया गया है जो बी.एससी, एम.एससी., पीएच.डी. प्रवेश परीक्षा, जे.आर.एफ., एस.आर.एफ., ए.आर.एस., साक्षात्कार, मौखिक परीक्षा के साथ-साथ किसानों आदि के लिए भी बहुत उपयुक्त है। यह प्रायोगिक पुस्तिका कीटविज्ञान के क्षेत्र में कैरियर बनाने में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए है। यह पुस्तिका अन्य रेशमकीट पालन पर लिखी पुस्तक को पढ़ने से प्राप्त विशाल ज्ञान को पुनः प्राप्त करने में सहायता करेगी। इसके अलावा, यह छात्रों, प्रशिक्षकों और कीटशास्त्र विभाग के क्षेत्र में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक मूल्यवान संसाधन होगी। इसको विकसित करने का लक्ष्य कीटशास्त्र विभाग के सभी छात्रों व किसानों को "शहतूत पत्तों के उत्पादन हेतु प्रौद्योगिकी" के पूरे क्षेत्र को स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ तरीके से बताना है। इस प्रायोगिक पुस्तिका को पूर्ण करने में विभिन्न भारतीय एवं विदेशी अधिमान्य पुस्तकों (चौधरी पी.सी. और गिरिधर के. 1987, शहतूत की खेती। 'उपयुक्त रेशम उत्पादन तकनीक। मनजीत एस. जॉली (सं.)। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ट्रेनिंग एंड रिसर्च ट्रॉपिकल सेरीकल्बर। मनंदवाड़ी रोड, पृ. 18-34. मिनामिजावा के. 1997. शहतूत की खेती, शहतूत की खेती का विज्ञान। ऑक्सफोर्ड और आईबीएच पब्लिशिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड पृ. 235-285।, राजन्ना एल., दास पी.के., रवींद्रन एस., बोगेशा के., मिश्रा आर.के., सिंघवी एन.आर., कटियार, आरएस. और जयराम एच. 2005. शहतूत की खेती और शरीर क्रिया विज्ञान। सीएसबी, पृ. 1-206।, राजन्ना एल., दास पी.के., रवींद्रन एस., भोगेशा के., मिश्रा आर.के., सिंघवी एन.आर.. कटियार आर.एस. और जयराम एच., 2005. शहतूत की खेती और शरीरक्रिया विज्ञान, सीएसबी, पृ. 1-206), पत्रिकाओं, सोशल मीडिया व विद्वानों की सहायता ली गई है। अतः हम सभी मूल लेखकों विद्वानों और प्रकाशकों के आभारी है।