वेदना : दार्शननक, आयुवेनदक और आधुननक पररप्रेक्ष्य
वेदना : दार्शननक, आयुवेनदक और आधुननक पररप्रेक्ष्य

वेदना : दार्शननक, आयुवेनदक और आधुननक पररप्रेक्ष्य

by नेहा, डॉ. विशाल जायसवाल, डॉ. राकेश कुमार जायसवाल, डॉ सरिता मीना and मोहित कुमार

Format:

Paperback and E-book

Pages:

181

ISBN:

978-93-47456-12-1

₹1000.00

"यह पुस्तक वेदना (दर्द) के स्वरूप, कारण और प्रबंधन का भारतीय दर्शन, आयुर्वेद तथा आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के आलोक में एक समग्र, तुलनात्मक और शोधपरक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।"

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"वेदना : दार्शनिक, आयुर्वेदिक और आधुनिक परिप्रेक्ष्य" एक विशिष्ट एवं बहुआयामी ग्रंथ है, जिसमें वेदना (Pain) की अवधारणा का भारतीय दार्शनिक चिंतन, आयुर्वेदिक सिद्धांतों तथा आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के आलोक में समग्र एवं तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। वेदना मानव जीवन की एक सार्वभौमिक अनुभूति है, जो केवल शारीरिक पीड़ा तक सीमित न होकर मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक आयामों को भी प्रभावित करती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पुस्तक में वेदना के स्वरूप, कारण, रोगजनन, वर्गीकरण, निदान एवं प्रबंधन के विविध पक्षों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विवेचन किया गया है।
पुस्तक के प्रारंभिक अध्यायों में भारतीय दर्शन की विभिन्न परम्पराओं में वेदना की अवधारणा, उसके अस्तित्वगत एवं आध्यात्मिक आयामों का वर्णन किया गया है। इसके पश्चात आयुर्वेद में वेदना की उत्पत्ति, दोष-दूष्य संबंध, वात की भूमिका तथा वेदना निवारण के सिद्धांतों एवं उपचारात्मक उपायों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। साथ ही आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में दर्द की न्यूरोफिजियोलॉजी, दर्द संप्रेषण तंत्र, दर्द के प्रकार, मूल्यांकन एवं आधुनिक दर्द प्रबंधन पद्धतियों का भी सुव्यवस्थित वर्णन किया गया है।
यह ग्रंथ प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मध्य एक सार्थक सेतु स्थापित करता है। सरल भाषा, प्रमाणिक संदर्भों एवं शोधपरक प्रस्तुति के कारण यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों, आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े सभी पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी। वेदना के समग्र अध्ययन एवं समझ के लिए यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में अपना विशिष्ट स्थान स्थापित करने की क्षमता रखती है।